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खूंखार (ज्वालामुखी PART-2) BY Anil Mohan

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कहर ढाता देवराज चौहान शोले बरसाती मंगोलिया की धरती। आकाश से बरसती मौत। इन सबसे मिलकर तैयार हुआ है- 'खूंखार' देवराज चौहान का खूनी कारनामा। अजगर खान ने घोड़े की लगाम खींची। तीव्र हिनहिनाहट के साथ घोड़ा अपनी अगली दोनों टांगें उठाने के बाद रुका। अजगर खान ने एक निगाह खुमान सिंह के शानदार बंगले पर मारी फिर उछलकर घोड़े से नीचे उतर आया। लगाम थामे वह फाटक के पास पहुंचा। वहां मौजूद दोनों हथियार बंद पहरेदारों ने उसे देखा। "मुझे खुमान सिंह से मिलना है।" "क्यों?" "काम है।" अजगर खान के माथे पर बल पड़ गए- "तू क्यों पूछता है? भीतर खबर कर। जानता नहीं मुझे! अजगर खान नाम है मेरा। भीतर जाकर बोल।" एक पहरेदार भीतर की तरफ बढ़ गया। अजगर खान ने घोड़े की लगाम स्टैंड पर बांध दी। खुमान सिंह से तो उसकी मुलाकात नहीं हो सकी अलबत्ता आधे घंटे के बाद उसे गजाला के सामने हाजिर कर दिया गया। अजगर खान के एतराज उठाने का सवाल ही पैदा नहीं होता था। वह जिस काम की खातिर आया था, उसके लिए खुमान सिंह की बेटी गजाला से मुलाकात हो या खुमान सिंह से, बात एक ही थी। वह तो उनके कंधे पर बंदूक ...

ज्वालामुखी (Devraj Chauhan Series) by Anil Mohan

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रेगिस्तान की गर्म रेत को ठंडा करता खून। बारूदों के धमाके और बरसाती गोलियों के बीच आपको ले जाएगा, देवराज चौहान। चालीस अरब के खजाने को हथियाने की खींचा तानी ! कौन जीता और कौन हारा? मौत के शोलों के बीच में गुजरता देवराज चौहान। 🔥 ज्वालामुखी – अनिल मोहन का विस्फोटक थ्रिलर 🔥 हिंदी थ्रिलर उपन्यासों की दुनिया में ‘ज्वालामुखी’ एक ज़बरदस्त धमाका है! जब भी हिंदी थ्रिलर उपन्यासों की बात होती है, तो अनिल मोहन का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं होता। वे "विक्रम-बेताल" और "विनाशपुत्र" जैसी सुपरहिट सीरीज़ से जाने जाते हैं। लेकिन उनकी एक बेहद दमदार कृति "ज्वालामुखी" ने पाठकों को झकझोर कर रख दिया था। यह उपन्यास न केवल अपराध की दुनिया में झाँकता है, बल्कि समाज, व्यवस्था और इंसान की मनोवैज्ञानिक गहराइयों को भी उधेड़ता है। 📚 कहानी की पृष्ठभूमि "ज्वालामुखी" की कहानी एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है जो समाज की व्यवस्था से बुरी तरह टूट चुका है। वह ना कोई क्रांतिकारी है, ना कोई नेता – बल्कि एक आम इंसान है, जो परिस्थितियों के थपेड़े खाकर 'ज्वालामुखी' बन ...

पाप का घड़ा (Devraj Chauhan Series) by Anil Mohan

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शानदार, बेमिसाल डकैती! करोड़ों के जेवरातों को वाल्ट की अभेद्य सुरक्षा को धता बताते हुए लूट लिया गया और मजे की बात, जेवरातों के मालिक को भी गुमान न हुआ कि वह लुट चुका है! "पाप का घड़ा: देवराज चौहान की दुनिया में एक और धमाकेदार अध्याय – लेखक अनिल मोहन की क्राइम थ्रिलर की समीक्षा" भूमिका: हिंदी पॉकेट नॉवेल्स की दुनिया में यदि किसी नाम ने वर्षों से पाठकों को बांधे रखा है, तो वह है अनिल मोहन । उनका चर्चित पात्र देवराज चौहान एक ऐसा किरदार बन चुका है, जो अपराध, रहस्य और रणनीति का पर्याय है। "पाप का घड़ा" उसी श्रृंखला का एक रोमांचकारी उपन्यास है, जिसमें पाठकों को एक बार फिर हाई-स्टेक क्राइम की दुनिया में घुमाया गया है। लेखक के बारे में – अनिल मोहन: अनिल मोहन न केवल एक सफल उपन्यासकार हैं, बल्कि उन्होंने हिंदी थ्रिलर लेखन की शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। देवराज चौहान, राघव, और कई अन्य पात्रों के माध्यम से उन्होंने अपराध की जटिलताओं और मनोविज्ञान को बखूबी चित्रित किया है। उनकी लेखनी में सस्पेंस, एक्शन और इमोशन का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है। देवराज चौहान – नायक या ख...